रोयोन की सहयोगी प्रियंका त्रिपाठी द्वारा लिखी गयी एक कविता

सिर पर अरमानों का बोझ और आंखों में खोने का दर्द लिए, बेबसी की चादर ओढ़ बढ़ चला घर की ओर, अपनों के बीच सुकून की उम्मीद लिए। मीलों लंबा…

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रोयोंन की सहयोगी प्रियंका त्रिपाठी द्वारा लिखी गयी एक कविता –

सिर पर अरमानों का बोझ और आंखों में खोने का दर्द लिए, बेबसी की चादर ओढ़ बढ़ चला घर की ओर, अपनों के बीच सुकून की उम्मीद लिए। मीलों लंबा…

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